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Monday, June 24, 2024
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भारतीय भाषाएँ श्रेष्ठ ज्ञानार्जन की अचूक राहें- चंदन श्रीवास्तव

*भारतीय भाषाएँ श्रेष्ठ ज्ञानार्जन की अचूक राहें: चंदन श्रीवास्तव*
नेटवर्क डेस्क/JNA.पंकज गुप्ता
भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार तथा मैत्रेय कॉलेज ऑफ एजुकेशन एण्ड मैनेजमेंट हाजीपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषाओं में विद्यालयी शिक्षा तथा बहुभाषी शिक्षक का निर्माण विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 13-14 नवम्बर 2022, रविवार एवं सोमवार को किया जा रहा है। भारतीय भाषाओं में विद्यालयी इस संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. विनोदानन्द झा, पूर्व निदेशक, शोध एवं प्रशिक्षण, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार, पटना, उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष श्री नागेंद्र नाथ, पूर्व निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी., पटना, बिहार, विषय विशेषज्ञ डॉ. धनंजय धीरज, विभागाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग, गया कॉलेज, गया, विषय विशेषज्ञ डॉ. सुबोध कुमार झा, विभागाध्यक्ष, अँग्रेजी विभाग, एस.एन. सिन्हा कॉलेज, जहानाबाद, प्रो. निरंजन सहाय, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी, डॉ. सूर्य कुमार झा, पूर्व प्राचार्य, राजकीय शिक्षक-प्रशिक्षण महाविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, डॉ. सुजीत द्विवेदी, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग (बी.एड.), बी.एस.ए. कॉलेज बहेरी, दरभंगा, डॉ. इम्तियाज़ आलम, प्राचार्य, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, तुर्की, मुजफ्फरपुर, एवं शिव कुमार, संस्थापक, टीचर्स ऑफ बिहार के द्वारा किया गया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. चन्दन श्रीवास्तव, शैक्षिक समन्वयक, भारतीय भाषा समिति, प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, कार्यक्रम समन्वयक एवं प्राचार्य, मैत्रेय कॉलेज ऑफ एजुकेशन एंड मैनेजमेंट, हाजीपुर, कार्यक्रम-सह-समन्वयक अजय कुमार सिंह एवं रेखा कुमारी व राज्य भर से सैकड़ो प्रतिभागियों ने सहभागिता व प्रस्तुतिकर्ता के तौर पर भाग लिया।

कार्यक्रम समन्वयक एवं प्राचार्य प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुये कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रावधान है कि कम से कम पांचवी कक्षा तक बच्चों को मातृभाषा या किसी अन्य भारतीय भाषाओं में पढ़ाई करवाई जाए। इस नियम के माध्यम से सरकार का उद्देश्य बच्चों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्येक राज्य की अलग-अलग प्रांतों की अपनी भाषा है। यह केवल उच्चारण मात्र नहीं है बल्कि यह बोली है जो एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बदल जाती है। एक से अधिक भाषाओं में बोलने की योग्यता को वैश्विक स्तर पर आदर और सम्मान प्राप्त होता है।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. विनोदानन्द झा, पूर्व निदेशक, शोध एवं प्रशिक्षण, शिक्षा विभाग, बिहार सरकार, पटना ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बहुभाषिता हमारी शक्ति है और हम सभी को इसे समृद्ध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना भाषा के शिक्षा संभव नहीं है। कक्षा को बहुभाषी बनाकर बच्चों को बेहतर तरीके से समझाने में मदद मिलती है।

विषय विशेषज्ञ डॉ. सुबोध कुमार झा ने अपने सम्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा के प्रति सम्मान होना चाहिए। जो बच्चे मातृभाषा में पढ़ाई करते है वे ज्यादा सीखते हैं। केवल किताबों के आधार पर भाषा नहीं सीखी जा सकती है।

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि डॉ. चन्दन श्रीवास्तव, शैक्षिक समन्वयक, भारतीय भाषा समिति ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में कहा कि शब्दशाला, भाषा सागर, यू.जी.सी. के साथ सभी भाषाओं में शिक्षण की सामाग्री निर्माण आदि का काम किया जा रहा है। हम भारतीय शिक्षा की बात करते हैं। श्रेष्ठ ज्ञानार्जन की अचूक राहें हैं हमारी भारतीय भाषाएँ। पूरे बिहार से इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शिक्षक प्रशिक्षकों, प्रशिक्षुओं एवं अधिकारियों ने सैकड़ों की संख्या में भाग लिया। मीडिया पार्टनर के रूप मे टीचर्स ऑफ़ बिहार ने सराहनीय भूमिका निभाई।वैशाली के डिस्ट्रिक्ट मेंटर रितेश कुमार, मृदुला भारती, मनोज कुमार, नीरज कुमार सहित टीचर्स ऑफ बिहार के कई सदस्यों ने इस संगोष्ठी में भाग लिया।
इस बात की जानकारी प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय ठाकुर के द्वारा संयुक्त रूप से दी गई।

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