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Wednesday, July 24, 2024
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जिससे किसान बंधुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है

खगड़िया सदर:किसान भाइयों आजकल आम के फसल में एक बीमारी बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है। जिससे किसान बंधुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीमारी को कई नामों से जाना जाता है जैसे काला टीका रोग, कोइलिया रोग अथवा ब्लैक टिप ऑफ मैंगो। यह रोग मुख्यतः उन्हीं बागों में देखा जाता है जो किसी ईट भट्ठे के आसपास स्थित हो। जब आम आकार थोड़ा बड़ा हो तो, इसके लक्षण दिखाई देने लगता है। सुरूआत में आम के निचले हिस्से पर पहले हल्के काले निशान दिखाई देते है जो धीरे-धीरे बढ़ता है और काला पड़ जाता है तथा फल के निचले हिस्से में फैल जाता है। फल का वह भाग प्रायः कङा हो जाता है। वहीं कुछ प्रबेधों (दशहरी) में फल का निचला छोर पतला हो जाता है तथा ज्यादा हरा दिखता है। कभी-कभार आम का काला हो चुके हिस्से में छोटे-छोटे कीटों का प्रकोप भी देखने को मिलता है। सही समय पर इसका उप उपचार नहीं किया गया तो आम का फल गलने लगता है और फसल की गुणवता मे कमी आजाती है। मुल रुप से अगर देखा जाए तो यह कोई बीमारी नहीं है, वास्तव में यह महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के कमी के कारण होता है।

इस विकार के रोकथाम के लिए बोरेक्स 1% या बोरेक्स 2.5 ग्राम प्रति प्रति 3 लीटर या सोलापुर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर संध्या के समय आम के बागों पर छिड़काव करना चाहिए। आम का बाग ईंट के भट्टे के 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दक्षिण दिशा में लगाने से रोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है यदि बाग के पास ईट के भट्टे हो तो उनकी चिमनी की ऊंचाई अधिक होनी चाहिए।

इसी तरह का एक बीमारी और वर्तमान परिवेश में आम के फलों में देखने को मिल रही है, इस बीमारी में आम फटने लगता है। परिणामस्वरूप किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। आम का फटना कई कारणों से हो सकता है।
👉बागों का उचित प्रबंध ना होना। कई बार किसान आम के बागानों का उचित प्रबंधन नहीं करते हैं। कई किसान केवल वृक्षों में मंजर आने से ले कर फलों की तुड़ाई होने तक ही बागों की देख-रेख करते हैं। कई महीनों तक सही देख-रेख नहीं होने के कारण वृक्षों को उचित पोषक तत्व नहीं मिलता है। परिणाम स्वरुप फल फटने लगते हैं।
👉तापमान में बदलाव : गर्म एवं सूखे मौसम में फलों के फटने की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही दिन एवं रात के तापमान में अधिक अंतर होना भी फलों के फटने के मुख्य कारणों में शामिल है। इसके अलावा लम्बे समय तक सूखा पड़ने के बाद हुई भारी वर्षा से भी फल फटने की समस्या शुरू हो जाती है।
👉असंतुलित मात्रा में पोषक तत्व : पोषक तत्वों की कमी या असंतुलित मात्रा में पोषक तत्वों का प्रयोग करने से भी फल फटने लगते हैं।
आता है इस बीमारी से बचने के लिए बोरेक्स 1% या बोरेक्स 2.5 ग्राम प्रति प्रति 3 लीटर या सोलापुर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर संध्या के समय आम के बागों पर छिड़काव किया जा सकता है।

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