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Monday, June 24, 2024
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जब से चले गए तुम इस जहां से तब से अन्धेरा फिर डरवाना सा लगने लगा है , लौट कर आ – जाओ फिर तुम– इक बार -आमजन, मिगलानी परिवार पुकारने लगा है — ===================== जब जनता सो रही थी तब मिगलानी परिवार जाग रहा था आम तौर पर कहा जाता है कि ग्रामीण इलाके में रहने वाले व्यक्तियो का राजनितिक सफर की एक हद होती है पर ये सब एक भले पुरूष तेजस्वी ईमानदार व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के लिए कोई मुश्किल राह न थी उन्होने जीवन का सफर सर्वप्रथम एक पार्षद का चुनाव जीतकर शुरूआत की उसके बाद सच्ची लग्न मेहनत व दूसरो की सेवा करने की जिज्ञासा उनमे कूट-कूट कर भरी थी जिसकी वजह से वो दो बार गजसिंहपुर में चैयरमैन के पद की भूमिका निभाई , तब पार्टी का दो ही बोलबाला खूब था इन्हे किसी पार्टी की टिकट न मिलने पर ये अपनी तेज छवि के कारण जनता के फरिश्ते कहे जाने वाले मिगलानी श्रीकरणपुर विधानसभा मे निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर इक्कीस हजार मत हांसिल किए, कहां किसमे इतनी हस्ती छुपी है ,उगते सुरज को उगने से रोक सके, आखिर तब सता पक्ष के पूर्व राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत मिगलानी की ईमानदारी देखकर कदमो को रोक न सके चलाकर श्रीकरणपुर भाजपा पार्टी की कमान संभालने की बात कही जिस समय मिगलानी ने भाजपा का कवच पहना तब श्रीकरणपुर श्रेत्र पर अच्छे रसूखदार लोगो का दब-दबा खूब बना हुआ था तब ऐसी मुश्किल परिस्थितीयो में पार्टी के जीत पाना बहूत ही टेढ़ी बात थी कहा जाता है कि जिसके हौसलें बुलंद हो उसे क्या रोक पाऐगीं हवाऐ। उन दिनो मिगलानी के दिलो दिमाग मे पब्लिक भक्ति के प्रति जलवा था व उधर भाजपा दवारा सौंपी गई जिम्मेवारी थी , एक बुजुर्ग ने बताया कि वो हमेशा जमीन से जुड़े हुए व्यक्तियो से अत्याधिक मेलजोल रखने मे विश्वास रखते थे वो स्पष्ट कहा करते थे जिसका कोई भी कार्य हो वो सीधे आऐ विचौलोया नही । उसकी इसी सादगी का परिणाम हुआ जो वह 1990 में चुनाव जीतकर सीधे राजस्थान सरकार मे राज्य कल्याण मन्त्री पद पर रहे। उसकी यह सफलता कुछ राजनेताओ को रास नही आई मन -मन ही उससे ईर्षा के भाव खाते हुए गिराने की कोशिश मे लगे रहे ,पर आखिर पलो तक भी मिगलानी ने राजनिति अखाड़ा नही छोड़ा वो पूर्व सीएम वसुंधरा द्वारा पंजाबी अकादमी अध्यक्ष पद पर भी रहे आखिरी पलो तक व राजनिति से जुड़े रहे, जीवन के लास्ट दिनो निराश रहे जब उन्हे श्रीकरणपुर विधान सभा से टिकट हांसिल नही हुई तो फिर भाजपा पार्टी को टुटने तक नही दिया हजारो की संख्या में भाजपा की मजबूती छोड़ गए, पब्लिक से जुड़े रहना अच्छे कार्य करना पद चिन्ह पर चलने के लिए वो अपना पूरा मिगलानी परिवार व उनके बेटे फूल चंद मिगलानी जिनके चर्चे राजस्थान में मशहूर है जिन्होने लगभग 15 साल बाद पदमपुर में कांग्रेस का बोर्ड बनाकर यह सिद्ध कर दिया कि- वो रहे ना रहे पर दिल मे जज्बा हिन्दुस्तानी खून मिगलानी परिवार का है, हां एक उसका अन्य बेटा जो राजनितिक का चाणक्य माना जाता है ,जो पूर्व मे अरोड़वंश का अध्यक्ष भी रह चुका है , बाकि हां बात करते है आज भाजपा की तो इन्ही के पदो से खोखली नजर आ रही है । अंधेरी नगरी को उजियारे में लाने वाले स्वर्गीय कुन्दन लाल मिगलानी ऐसे पहले शख्स थे जो नहे रहे हमारे बीच, पर हां ये सब कहना मुमकिन नही है , वास्तविकता यह है कि ऐसे लोग कभी कभी मरते नहीं है, जो दूसरो के हित के लिए कार्य करते हुए गांव मोड़,शहर रोड़ पर लगे शिलान्यास पर लगी पट्टिका बोलती है, कहां गए वो दिन कहां खो गए तुम आज मिगलानी परिवार के बिखरे विचार, कोई इधर कोई उधर जिधर देखो कुन्दन लाल मिगलानी परिवार को याद कर रहे है लोग उधर – राजनिति की लहर 1990 मे उस समय कुन्दन लाल मिगलानी स्टार बनकर उभरे जब जनता परेशानीयो जूझ रही थी अब ना वो मांझी रहे न वो कश्ती रही मिट गई वो हस्ती –

जब से चले गए तुम इस जहां से
तब से अन्धेरा फिर डरवाना सा लगने लगा है , लौट कर आ – जाओ फिर तुम–
इक बार -आमजन, मिगलानी परिवार पुकारने लगा है —

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जब जनता सो रही थी तब मिगलानी परिवार जाग रहा था आम तौर पर कहा जाता है कि ग्रामीण इलाके में रहने वाले व्यक्तियो का राजनितिक सफर की एक हद होती है पर ये सब एक भले पुरूष तेजस्वी ईमानदार व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के लिए कोई मुश्किल राह न थी उन्होने जीवन का सफर सर्वप्रथम एक पार्षद का चुनाव जीतकर शुरूआत की उसके बाद सच्ची लग्न मेहनत व दूसरो की सेवा करने की जिज्ञासा उनमे कूट-कूट कर भरी थी जिसकी वजह से वो दो बार गजसिंहपुर में चैयरमैन के पद की भूमिका निभाई , तब पार्टी का दो ही बोलबाला खूब था इन्हे किसी पार्टी की टिकट न मिलने पर ये अपनी तेज छवि के कारण जनता के फरिश्ते कहे जाने वाले मिगलानी श्रीकरणपुर विधानसभा मे निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर इक्कीस हजार मत हांसिल किए, कहां किसमे इतनी हस्ती छुपी है ,उगते सुरज को उगने से रोक सके, आखिर
तब सता पक्ष के पूर्व राष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत मिगलानी की ईमानदारी देखकर कदमो को रोक न सके चलाकर श्रीकरणपुर भाजपा पार्टी की कमान संभालने की बात कही जिस समय मिगलानी ने भाजपा का कवच पहना तब श्रीकरणपुर श्रेत्र पर अच्छे रसूखदार लोगो का दब-दबा खूब बना हुआ था तब ऐसी मुश्किल परिस्थितीयो में पार्टी के जीत पाना बहूत ही टेढ़ी बात थी कहा जाता है कि जिसके हौसलें बुलंद हो उसे क्या रोक पाऐगीं हवाऐ। उन दिनो मिगलानी के दिलो दिमाग मे पब्लिक भक्ति के प्रति जलवा था व उधर भाजपा दवारा सौंपी गई जिम्मेवारी थी , एक बुजुर्ग ने बताया कि वो हमेशा जमीन से जुड़े हुए व्यक्तियो से अत्याधिक मेलजोल रखने मे विश्वास रखते थे वो स्पष्ट कहा करते थे जिसका कोई भी कार्य हो वो सीधे आऐ विचौलोया नही ।
उसकी इसी सादगी का परिणाम हुआ जो वह 1990 में चुनाव जीतकर सीधे राजस्थान सरकार मे राज्य कल्याण मन्त्री पद पर रहे। उसकी यह सफलता कुछ राजनेताओ को रास नही आई मन -मन ही उससे ईर्षा के भाव खाते हुए गिराने की कोशिश मे लगे रहे ,पर आखिर पलो तक भी मिगलानी ने राजनिति अखाड़ा नही छोड़ा वो पूर्व सीएम वसुंधरा द्वारा पंजाबी अकादमी अध्यक्ष पद पर भी रहे आखिरी पलो तक व राजनिति से जुड़े रहे, जीवन के लास्ट दिनो निराश रहे जब उन्हे श्रीकरणपुर विधान सभा से टिकट हांसिल नही हुई तो फिर भाजपा पार्टी को टुटने तक नही दिया हजारो की संख्या में भाजपा की मजबूती छोड़ गए,
पब्लिक से जुड़े रहना अच्छे कार्य करना पद चिन्ह पर चलने के लिए वो अपना पूरा मिगलानी परिवार व उनके बेटे फूल चंद मिगलानी जिनके चर्चे राजस्थान में मशहूर है जिन्होने लगभग 15 साल बाद पदमपुर में कांग्रेस का बोर्ड बनाकर यह सिद्ध कर दिया कि- वो रहे ना रहे पर दिल मे जज्बा हिन्दुस्तानी खून मिगलानी परिवार का है, हां एक उसका अन्य बेटा जो राजनितिक का चाणक्य माना जाता है ,जो पूर्व मे अरोड़वंश का अध्यक्ष भी रह चुका है , बाकि हां बात करते है आज भाजपा की तो इन्ही के पदो से खोखली नजर आ रही है ।

अंधेरी नगरी को उजियारे में लाने वाले स्वर्गीय कुन्दन लाल मिगलानी ऐसे पहले शख्स थे जो नहे रहे हमारे बीच, पर हां ये सब कहना मुमकिन नही है , वास्तविकता यह है कि ऐसे लोग कभी कभी मरते नहीं है, जो दूसरो के हित के लिए कार्य करते हुए
गांव मोड़,शहर रोड़ पर लगे शिलान्यास पर लगी पट्टिका बोलती है, कहां गए वो दिन
कहां खो गए तुम
आज मिगलानी परिवार के बिखरे विचार, कोई इधर कोई उधर
जिधर देखो कुन्दन लाल मिगलानी परिवार को याद कर रहे है लोग उधर –
राजनिति की लहर 1990 मे उस समय कुन्दन लाल मिगलानी स्टार बनकर उभरे जब जनता परेशानीयो
जूझ रही थी अब
ना वो मांझी रहे न वो कश्ती रही
मिट गई वो हस्ती –

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युद्ध में शहीद हुए परिवारों की विधवाओं को गोद लेने पर NCCHWO परियोजना की उपराज्यपाल जम्मू-कश्मीर ने सराहना की* ======================PUSHPA BHATI NCCHWO NATIONAL MEDIA PARBHARI ====================== 1. जम्मू-कश्मीर में वीर नारियों के परिवारों को गोद लेने के लिए नागरिकों को प्रेरित करने के लिए एन सी सी एच डब्ल्यू ओ के राष्ट्रीय प्रशासक ब्रिगेडियर हरचरण सिंह द्वारा एक परियोजना की परिकल्पना की गई थी। इसके अलावा, सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए, कॉमर्स कॉलेज जम्मू के छात्रों के लिए देशभक्ति विषय पर आधारित पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। बलिदान स्तंभ जम्मू से पौनी में नवनिर्मित अमर जवान शौर्य स्थल के बीच 95 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी रास्ते से साइकिल की सवारी कराई गई। 2. पूनी के लोगों द्वारा संत बाल योगेश्वर दास जी के गतिशील नेतृत्व में एक युद्ध स्मारक का निर्माण किया गया था। उद्घाटन जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा किए जाने की योजना थी। निर्णय लिया गया कि साइकिल चालकों, चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं और वीर नारियों को गोद लेने के लिए स्वयंसेवा करने वाले गैर सरकारी संगठनों को प्रशंसा पत्र भेंट किया जाए। सैन्य प्रेस्टन के साथ एक प्रभावशाली समारोह आयोजित किया गया, जहां जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने अमर जवान शौर्य स्तंभ का उद्घाटन किया और माल्यार्पण किया। 3. ब्रिगेडियर हरचरण सिंह ने वीर नारियों के दत्तक ग्रहण कार्यक्रम, देशभक्ति विषय पर आधारित चित्रकला प्रतियोगिता और साइकिलिंग अभियान की अवधारणा पेश की। प्रवीण रैना के नेतृत्व में जम्मू हिल्स स्पोर्ट्स क्लब के 12 साइकिलिस्टों को सम्मानित किया गया। चार पेंटिंग प्रतियोगिता विजेता छात्रों, समन्वयक दीपशिखा और गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज जम्मू की प्रिंसिपल को प्रशंसा पत्र भेंट किया गया। वीर नारियों को गोद लेने के लिए, गैर सरकारी संगठनों के अध्यक्षों को उनकी टीम के सदस्यों के साथ सम्मानित किया गया। एसएस जैन सभा तालाब तिलू से श्री गीत जैन, एसएस जैन सभा त्रिकुटा नगर से जैनिंदर जैन, जैन महिला मंडल से सुनंदा जैन, आईडब्ल्यूसी जम्मू तवी से प्रमजीत कौर, अदिति सेवा प्रतिष्ठान की सुश्री पंकजा और एनसीसीएचडब्ल्यूओ के रमणिक सिंह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से प्रशंसा प्रमाण पत्र प्राप्त किया। सभी वीर नारियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। 4. यह एक विचार प्रक्रिया की शुरुआत थी, जिसमें नागरिकों को वीर नारियों के परिवारों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया था, ताकि उन्हें आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा सके और अपने बच्चों को कैरियर परामर्श के साथ मार्गदर्शन किया जा सके। मानसिक आघात के संकेतों की पहचान करने के लिए वीर नारियों की स्कैनिंग करने के लिए मनोवैज्ञानिक की सेवाओं की योजना बनाई जा रही है। उम्मीद है कि शहीदों के परिवारों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए इस तरह की परियोजनाएं पूरे भारत में शुरू की जाएंगी।
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Manohar on *स्वर्गीय पासवान की स्मृति और आदर्श सदैव प्रेरणादायक:शास्त्री* खगड़िया, 26 अक्तूबर 2022 सदर प्रखण्ड के रानीसकरपुरा निवासी पूर्व जिला परिषद् प्रत्याशी व जदयू नेता समाजसेवी स्मृतिशेष दिवंगत राजेश पासवान के याद में रानीसकरपुरा पंचायत के वार्ड नं 01 स्थित सुशिला सदन के परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।जिसकी अध्यक्षता स्थानीय पंसस प्रतिनिधि रवि कुमार पासवान ने की।जबकि मंच संचालन डॉ0 मनोज कुमार गुप्ता ने किया।सर्वप्रथम उपस्थित अतिथियों तथा शुभचिंतकों के द्वारा उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। मौके पर जदयू के जिला प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि स्वर्गीय राजेश पासवान की मधुर स्मृति, स्नेह,आदर्श, मार्गदर्शन एवं उनके आशीर्वाद हमसबों के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेंगे।उन्होंने कहा कि जब कभी भी बरैय और रानीसकरपुरा पंचायत के राजनीतिक व सामाजिक कार्यों में बेहतर भूमिका निभाने वालों की चर्चा होगी तो उसमें स्वर्गीय पासवान का नाम श्रद्धापूर्वक लिया जाएगा। इस अवसर पर रामपुकार पासवान, रामविलाश पासवान, रामदेव पासवान, चन्दर पासवान, अरूण पासवान, जदयू नेत्री ईशा देवी, रीना देवी, बिभा कुमारी,राजीव पासवान, अमित पासवान, सरोज पासवान, विजय पासवान, जितेन्द्र पासवान, दीपक कुमार, हरिवंश कुमार, अभिषेक कुमार, वार्ड सदस्या सुशीला देवी,अनोज कृष्ण,चिराग व बिक्रम कुमार आदि दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे