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Wednesday, July 24, 2024
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खेजड़ी वृक्षों की हो रही अवैध कटाई। तहसील प्रशासन ने मौके पर पंहुच खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई रुकवायी। पदमपुर (राकेश खींचीं) खेजडी या शमी एक वृक्ष है।राजस्थान राज्य का राज्य वृक्ष हैं।राजस्थान के सांगवान के नाम से भी प्रचलित हैं। खेजड़ी वृक्ष को अन्य नामों से जैसे खेजड़ी,जांटी,सांगरी,कांडी आदि नाम से भी जाना जाता है। इसका व्यापारिक नाम कांडी है।इस वृक्ष के जैसा नाम वैसे गुण भी हैं।खेजड़ी वृक्षों कटाई पदमपुर तहसील के निकट वर्ती गांव फरसेवाला में हनुमान मील के खेत मे बिक्री के उद्देश्य से बिना प्रशासन की अनुमति के अवैध कटाई की जा रही थी। जिसकी सूचना तहसीलदार महेंद्र सिंह रतनु को मिलने पर मौके पर पंहुची टीम ने तहसीलदार महेंद्र सिंह रत्नु के निर्देशन में गांव फरसेवाला में हनुमान मील के खेत मे कट रहे खेजडी वृक्षों की पुष्टी की गई। टीम में आशिष मीणा पटवारी सहित अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचकर खेजड़ी के वृक्षों की कटाई को रोका गया।नायब तहसीलदार मुकुल टाक ने बताया कि उक्त मामले में प्रकरण उपखंड कार्यालय पदमपुर में सोमवार को मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। *खेजड़ी राज्य वृक्ष का अस्तित्व खतरे में।* खेजड़ी वृक्ष का अस्तित्व पहले से ही खतरे में है।पहले खेजड़ी के वृक्ष 35 से 40 प्रति हेक्टेयर वृक्ष होते थे।अब इनकी संख्या 8 से 12 प्रति हेक्टेयर रह गई हैं।अज्ञात रोग व अवैध कटाई की बजह से इनकी संख्या पहले से कम है।विलुप्त होने के कगार पर राज्य वृक्ष खेजड़ी।अवैध कटाई का गोरखधंधा जारी।इसी क्रम में गांव फरसेवाला में हो रही हैं खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई।पर्यावरण को बचाने का दावा खटाई में।राजस्थान राज्य वृक्ष एवम सामजिक धरोहर एक ओर जलवायु परिवर्तन की भविशिका का सामना तो कर रही।वहीं कंहीअवैध कटाई से राज्य वृक्ष का अस्तित्व खतरे में चला है।खेजड़ी वृक्ष के गुणों के कारण ही इसे मरुप्रदेश के कल्पवृक्ष की संज्ञा दी जाती हैं। *राजस्थान सरकार द्वारा समय समय पर किये जा रहे है कारगर उपाय।* राजस्थान सरकार द्वारा खेजड़ी राज्य वृक्ष बचाने के लिए अनेक प्रकार की योजनाओं को लागू कर रही है।इनके अस्तित्व को बचाने के कारगर उपाय कर रही हैं।खेजड़ी वृक्ष को काटने पर कठोर नियम कानून लागू कर रही। अभी हाल ही में 5 अक्टूबर 2022 को राजस्थान सरकार द्वारा प्रत्येक राजकीय कार्यालयों में खेजड़ी वृक्षों के पौधों का वितरण कर पौधारोपण किया गया।

खेजड़ी वृक्षों की हो रही अवैध कटाई।

तहसील प्रशासन ने मौके पर पंहुच खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई रुकवायी।

पदमपुर (राकेश खींचीं) खेजडी या शमी एक वृक्ष है।राजस्थान राज्य का राज्य वृक्ष हैं।राजस्थान के सांगवान के नाम से भी प्रचलित हैं।
खेजड़ी वृक्ष को अन्य नामों से जैसे खेजड़ी,जांटी,सांगरी,कांडी आदि नाम से भी जाना जाता है। इसका व्यापारिक नाम कांडी है।इस वृक्ष के जैसा नाम वैसे गुण भी हैं।खेजड़ी वृक्षों कटाई पदमपुर तहसील के निकट वर्ती गांव फरसेवाला में हनुमान मील के खेत मे बिक्री के उद्देश्य से बिना प्रशासन की अनुमति के अवैध कटाई की जा रही थी। जिसकी सूचना तहसीलदार महेंद्र सिंह रतनु को मिलने पर मौके पर पंहुची टीम ने तहसीलदार महेंद्र सिंह रत्नु के निर्देशन में गांव फरसेवाला में हनुमान मील के खेत मे कट रहे खेजडी वृक्षों की पुष्टी की गई। टीम में आशिष मीणा पटवारी सहित अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचकर खेजड़ी के वृक्षों की कटाई को रोका गया।नायब तहसीलदार मुकुल टाक ने बताया कि उक्त मामले में प्रकरण उपखंड कार्यालय पदमपुर में सोमवार को मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
*खेजड़ी राज्य वृक्ष का अस्तित्व खतरे में।*
खेजड़ी वृक्ष का अस्तित्व पहले से ही खतरे में है।पहले खेजड़ी के वृक्ष 35 से 40 प्रति हेक्टेयर वृक्ष होते थे।अब इनकी संख्या 8 से 12 प्रति हेक्टेयर रह गई हैं।अज्ञात रोग व अवैध कटाई की बजह से इनकी संख्या पहले से कम है।विलुप्त होने के कगार पर राज्य वृक्ष खेजड़ी।अवैध कटाई का गोरखधंधा जारी।इसी क्रम में गांव फरसेवाला में हो रही हैं खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई।पर्यावरण को बचाने का दावा खटाई में।राजस्थान राज्य वृक्ष एवम सामजिक धरोहर एक ओर जलवायु परिवर्तन की भविशिका का सामना तो कर रही।वहीं कंहीअवैध कटाई से राज्य वृक्ष का अस्तित्व खतरे में चला है।खेजड़ी वृक्ष के गुणों के कारण ही इसे मरुप्रदेश के कल्पवृक्ष की संज्ञा दी जाती हैं।
*राजस्थान सरकार द्वारा समय समय पर किये जा रहे है कारगर उपाय।*
राजस्थान सरकार द्वारा खेजड़ी राज्य वृक्ष बचाने के लिए अनेक प्रकार की योजनाओं को लागू कर रही है।इनके अस्तित्व को बचाने के कारगर उपाय कर रही हैं।खेजड़ी वृक्ष को काटने पर कठोर नियम कानून लागू कर रही। अभी हाल ही में 5 अक्टूबर 2022 को राजस्थान सरकार द्वारा प्रत्येक राजकीय कार्यालयों में खेजड़ी वृक्षों के पौधों का वितरण कर पौधारोपण किया गया।

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